लोन ऐप का लोन न चुकाएँ तो क्या होता है?
जवाब एक बात पर टिका है: ऐप के पीछे RBI से रेगुलेटेड लोन देने वाला है या नहीं। पहले यही पता कीजिए, क्योंकि दोनों में सही कदम बिल्कुल अलग है।
लेखक: Aniket Sanduja · पढ़ने में 6 मिनट · अपडेट: 28 सितंबर 2026
पहले जाँचिए कि ऐप के पीछे की कंपनी RBI से रेगुलेटेड है या नहीं। पाँच मिनट लगते हैं। फिर वह कॉलम पढ़िए जो आप पर लागू होता है।
| RBI-रेगुलेटेड लोन देने वाला (बैंक या NBFC) | गैर-कानूनी / बिना रजिस्ट्रेशन वाला ऐप | |
|---|---|---|
| क्या पैसा बकाया है? | हाँ: मूलधन और KFS में बताया गया ब्याज व फीस | आपको असली पैसा मिला था, इसलिए हो सके तो उतना लौटाइए जितना असल में मिला। बढ़ा-चढ़ा ब्याज और "जुर्माना" अदालत शायद ही लागू करवाए |
| क्रेडिट स्कोर | चूकी हुई किस्तें क्रेडिट ब्यूरो को जाती हैं और सालों तक स्कोर गिराती हैं | रिपोर्ट नहीं कर सकता; ब्यूरो का सदस्य नहीं है |
| वसूली | याद दिलाने वाले कॉल, फिर RBI की आचार संहिता से बँधे वसूली एजेंट | धमकियाँ, कॉन्टैक्ट्स को कॉल, मॉर्फ़्ड फ़ोटो: सब अपराध |
| कानूनी कार्रवाई | दीवानी अदालत या मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) जा सकता है; चेक या ऑटो-डेबिट बाउंस होने पर अलग केस हो सकता है | व्यावहारिक रूप से कुछ नहीं; इसके लिए उसे अदालत के सामने आना पड़ेगा |
| क्या करें | जल्दी ही कंपनी के शिकायत अधिकारी से बात कीजिए और किस्तों की योजना माँगिए | उत्पीड़न वाले कदम अपनाइए और शिकायत कीजिए |
अगर लोन देने वाला रेगुलेटेड है: असल में क्या होता है, क्रम से
- याद दिलाना और लेट फीसआपको SMS, ईमेल और कॉल आएँगे। लोन अनुबंध में लिखे हिसाब से लेट फीस और जुर्माना लगेगा; RBI के मुताबिक़ ये उचित हों, पहले से बताए गए हों, और ब्याज में जोड़कर उस पर ब्याज न लगे।
- क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्टकिस्त 30 दिन देर होने पर आम तौर पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखने लगती है। 90 दिन पर लोन आम तौर पर NPA (डूबा हुआ) माना जाता है, जिससे स्कोर बुरी तरह गिरता है और आगे लोन मुश्किल व महँगा हो जाता है।
- वसूली एजेंटकंपनी खाता किसी वसूली एजेंसी को दे सकती है। एजेंट को अपनी और कंपनी की पहचान बतानी होगी, वह सिर्फ़ सुबह 8 से शाम 7 बजे के बीच संपर्क कर सकता है, और धमका नहीं सकता, गाली नहीं दे सकता, सबके सामने शर्मिंदा नहीं कर सकता, और कर्ज़ के बारे में आपके दोस्तों-रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर सकता।
- लीगल नोटिस और दीवानी केसबड़ी रकम के लिए कंपनी लीगल नोटिस भेज सकती है, फिर दीवानी मुक़दमा या मध्यस्थता शुरू कर सकती है। अगर आपने चेक या ऑटो-डेबिट मैंडेट दिया था और वह बाउंस हुआ, तो उसके लिए अलग केस भी हो सकता है।
सेटलमेंट: काम का है, पर पहले यह पढ़िए
कंपनी बकाये से कम रकम पर "वन-टाइम सेटलमेंट" की पेशकश कर सकती है। इससे कॉल बंद हो जाते हैं, पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में लोन closed नहीं, settled दिखेगा, और बहुत-सी कंपनियाँ सालों तक "settled" को ख़तरे का संकेत मानती हैं। अगर संभाल सकें, तो पूरा चुकाकर बंद होने वाली किस्तों की योजना आपके भविष्य के लिए बेहतर है। जो भी तय हो, कंपनी के लेटरहेड पर लिखित में लीजिए, पैसा सिर्फ़ कंपनी के आधिकारिक खाते में भरिए (कभी किसी एजेंट की UPI पर नहीं), और आख़िर में नो-ड्यूज़ सर्टिफ़िकेट लीजिए।
अगर एजेंट हद पार करे तो आपके अधिकार
- कंपनी के शिकायत अधिकारी को लिखित शिकायत कीजिए; उनका नाम और संपर्क कंपनी की वेबसाइट और ऐप पर होना ज़रूरी है।
- 30 दिन में जवाब न आए, या आप संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर RBI लोकपाल से शिकायत कीजिए। यह मुफ़्त है।
- अगर आपको धमकाया या गाली दी जाए, तो यह पुलिस का मामला है: 1930 पर कॉल कीजिए या नज़दीकी थाने जाइए।
अगर इस महीने नहीं भर सकते, तो छिपिए मत। तारीख़ से पहले कंपनी से संपर्क कीजिए, बताइए क्या बदला (नौकरी गई, बीमारी), और कुछ समय की मोहलत या छोटी किस्तें माँगिए। जब आप पहले ख़ुद जाते हैं, तो कंपनियाँ कहीं ज़्यादा बार मान जाती हैं।
हमेशा के लिए बाहर निकलना
ज़्यादातर लोग लोन ऐप के कर्ज़ में इसलिए फँसते हैं क्योंकि कोई छोटा ख़र्च आया और उसके लिए नकद नहीं था। यह लोन निपटने के बाद एक छोटा इमरजेंसी फंड शुरू कीजिए, चाहे ₹500 महीना ही सही। अगर आपके पास सोना है और नकद चाहिए, तो बैंक गोल्ड लोन किसी भी ऐप से आम तौर पर बहुत सस्ता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या लोन ऐप न चुकाने पर मुझे गिरफ़्तार किया जा सकता है?
सिर्फ़ न चुका पाने पर नहीं। लोन डिफ़ॉल्ट दीवानी (सिविल) मामला है। आपराधिक मामला सिर्फ़ ख़ास हालात में बनता है, जैसे आपका दिया चेक बाउंस हो, या आपने नकली कागज़ों से कभी न लौटाने की नीयत से लोन लिया हो। WhatsApp पर गिरफ़्तारी की धमकी दबाव डालने की चाल है।
ऐप कहता है कि उसने केस कर दिया है और WhatsApp पर 'लीगल नोटिस' भेजा है। क्या करूँ?
असली लीगल नोटिस किसी पहचान वाले वकील या लोन देने वाली कंपनी से, लिखित में, कंपनी के नाम और आपके लोन खाते की जानकारी के साथ आता है। इसे डाक या ईमेल से माँगिए। WhatsApp पर कोर्ट या पुलिस के लोगो वाले नकली नोटिस आम हैं; उन्हें उत्पीड़न के सबूत के रूप में सँभालिए।
अगर ऐप गैर-कानूनी था तो क्या मेरे CIBIL स्कोर पर असर पड़ेगा?
गैर-कानूनी ऐप क्रेडिट ब्यूरो के सदस्य नहीं होते, इसलिए आपकी रिपोर्ट नहीं कर सकते। अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में किसी असली कंपनी का ऐसा लोन दिखे जिसे आप नहीं पहचानते, तो क्रेडिट ब्यूरो में उस पर आपत्ति दर्ज कीजिए।
क्या इसे चुकाने के लिए दूसरा लोन ले लूँ?
नहीं। ऐसे ही ₹5,000 का लोन कई ऐप में फैलकर लाखों का बन जाता है। उधार लेना ही पड़े तो सबसे सस्ता रेगुलेटेड रास्ता चुनिए: कंपनी से एडवांस, EPF, बैंक से गोल्ड लोन, या लिखित पर्ची के साथ परिवार से।