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लोन ऐप RBI से मान्य है या नहीं, कैसे जाँचें

पाँच जाँच, लगभग पाँच मिनट, सब मुफ़्त। इन्हें इंस्टॉल करने से पहले कीजिए, पैसा आने के बाद नहीं।

लेखक: Aniket Sanduja · पढ़ने में 5 मिनट · अपडेट: 28 सितंबर 2026

समझने वाली एक बात: RBI ऐप को मंज़ूरी नहीं देता। वह लोन देने वालों को लाइसेंस देता है: बैंक और NBFC (नॉन-बैंकिंग फ़ाइनेंशियल कंपनी)। लोन ऐप तभी कानूनी है जब पैसा असल में कोई लाइसेंस वाली कंपनी दे रही हो। इसलिए नीचे की हर जाँच असल में एक ही सवाल है: लोन देने वाला कौन है, और क्या RBI उसे जानता है?

जाँच 1: ऐप की लिस्टिंग में लोन देने वाली कंपनी का नाम ढूँढिए

ऐप का Play Store पेज खोलिए और About this app और डेवलपर की जानकारी तक स्क्रॉल कीजिए। Google भारत में पर्सनल लोन ऐप से उस बैंक या NBFC का नाम बताने को कहता है जिसके लिए वे लोन देते हैं। ऐप की अपनी वेबसाइट पर भी "Our lending partners", "NBFC partner" या "Digital lending" जैसा पेज देखिए।

अगर कहीं भी लोन देने वाली कंपनी का नाम नहीं मिलता, तो यहीं रुक जाइए। दूर रहने के लिए इतना ही काफ़ी है।

जाँच 2: उस कंपनी को RBI पर खोजिए

rbi.org.in पर RBI रजिस्टर्ड NBFC की सूची प्रकाशित करता है (साइट पर "NBFC list" या "list of NBFCs registered with RBI" खोजिए)। बैंक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में दर्ज हैं। जाँच 1 में मिला नाम हूबहू खोजिए।

  • नाम पूरा मिलना चाहिए, "Private Limited" या "Limited" समेत। फ़र्ज़ी ऐप असली NBFC से बस एक शब्द अलग नाम इस्तेमाल करते हैं।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर नोट कीजिए। असली कंपनी अपनी वेबसाइट और लोन के कागज़ों पर यही नंबर लिखेगी।
  • अगर कंपनी का प्रमाणपत्र रद्द हो चुका है, तो RBI वह भी प्रकाशित करता है। रद्द हुई NBFC लोन नहीं दे सकती।

जाँच 3: RBI की डिजिटल लेंडिंग ऐप्स सूची में ऐप खोजिए

जुलाई 2025 से RBI डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLA) की सूची प्रकाशित करता है। हर बैंक और NBFC को वे ऐप बताने होते हैं जिनसे वह लोन देता है, और RBI उन्हें कंपनी के नाम के सामने दिखाता है। इसे खोलने के लिए rbi.org.in पर "Digital Lending Apps" खोजिए।

यह जाँच सबसे आम चाल पकड़ती है: फ़र्ज़ी ऐप जो किसी असली NBFC को अपना पार्टनर बताता है। अगर NBFC असली है पर ऐप उसकी सूची में नहीं है, तो ऐप को उसकी तरफ़ से लोन देने का अधिकार नहीं है। लोन देने वाली कंपनी को अपनी वेबसाइट पर भी अपने सभी ऐप और पार्टनर बताने होते हैं; वहाँ भी मिलान कीजिए।

जाँच 4: देखिए ऐप क्या-क्या माँगता है

RBI के डिजिटल लेंडिंग नियम रेगुलेटेड ऐप को आपके पूरे फ़ोन की अनुमति लेने से रोकते हैं। शक कीजिए अगर ऐप माँगे:

  • कॉन्टैक्ट्स, फ़ोटो, मीडिया फ़ाइलें या कॉल लॉग। लोन देने वाले को आपकी पहचान और बैंक की जानकारी चाहिए, आपकी फ़ोन बुक नहीं। कॉन्टैक्ट्स की अनुमति से ही उत्पीड़न शुरू होता है।
  • लोन से पहले UPI से "प्रोसेसिंग" या "वेरिफ़िकेशन" फीस। असली फीस लोन में से कटती है और KFS में दिखती है, कभी पहले से नहीं ली जाती।
  • APK डाउनलोड लिंक जो SMS या WhatsApp से भेजा गया हो, Play Store या App Store से नहीं।

जाँच 5: की फ़ैक्ट स्टेटमेंट माँगिए

मंज़ूरी देने से पहले रेगुलेटेड ऐप को की फ़ैक्ट स्टेटमेंट (KFS) दिखानी होती है: लोन की रकम, हर फीस, कुल कितना लौटाना है, और सालाना प्रतिशत दर (APR), जिसमें फीस और ब्याज दोनों गिने जाते हैं। पैसा सीधे लोन देने वाली कंपनी के खाते से आपके बैंक खाते में आना चाहिए, और आपको कूलिंग-ऑफ़ अवधि मिलती है जिसमें मूलधन और उतने दिन का ब्याज लौटाकर लोन रद्द कर सकते हैं।

KFS नहीं है, या APR मंज़ूरी के बाद ही दिखता है, तो ऐप RBI के नियम नहीं मान रहा, चाहे उसकी होम स्क्रीन पर कुछ भी लिखा हो।

फिर भी पक्का नहीं? जिस मैसेज से आप ऐप तक पहुँचे, उसे हमारे SMS स्कैम चेकर में डालिए, या होम पेज के आठ खतरे के संकेत देखिए। दो या ज़्यादा सही हैं, तो डिलीट कर दीजिए।

इन जाँचों में फ़ेल होने वाला ऐप पहले से इंस्टॉल है?

उसकी अनुमतियाँ हटाइए (Settings → Apps → वह ऐप → Permissions), उसे अनइंस्टॉल कीजिए, और अगर उसके पास SMS की अनुमति थी तो UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड बदलिए। RBI के सचेत पोर्टल (sachet.rbi.org.in) पर ऐप की शिकायत कीजिए। अगर धमकियाँ शुरू हो गई हैं, तो उत्पीड़न वाली कदम-दर-कदम गाइड अपनाइए।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या RBI लोन ऐप को मंज़ूरी देता है?

सीधे नहीं। RBI बैंकों और NBFC को लाइसेंस देता है। कोई ऐप तभी कानूनी है जब असल में लोन कोई रेगुलेटेड बैंक या NBFC दे रहा हो। 2025 से रेगुलेटेड कंपनियों को अपने ऐप RBI को बताने होते हैं, और RBI उन्हें डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की सूची में प्रकाशित करता है।

ऐप कहता है कि वह 'कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में रजिस्टर्ड' है। क्या इतना काफ़ी है?

नहीं। कोई भी कंपनी MCA में रजिस्टर हो सकती है। आम लोगों को लोन देने के लिए बैंक या NBFC के रूप में RBI का लाइसेंस चाहिए (या स्थानीय साहूकारों के लिए राज्य का लाइसेंस)। सिर्फ़ MCA नंबर से लोन देने के बारे में कुछ साबित नहीं होता।

ऐप Google Play Store पर है। क्या इससे वह सुरक्षित नहीं हो जाता?

मदद मिलती है, पर यह सबूत नहीं है। Google भारत में लोन ऐप से उनकी लोन देने वाली कंपनी का नाम बताने को कहता है और बहुत-से फ़र्ज़ी ऐप हटाता है, पर हर हफ़्ते नए आ जाते हैं। Play Store लिस्टिंग से कंपनी का नाम निकालिए, फिर उस नाम को RBI से जाँचिए।

अगर ऐप कानूनी है पर ब्याज फिर भी बहुत ज़्यादा है?

कानूनी होने का मतलब सस्ता होना नहीं है। रेगुलेटेड ऐप को मंज़ूरी से पहले KFS में सालाना प्रतिशत दर (APR) दिखानी होती है। उसे पढ़िए। अगर APR 36% से ज़्यादा है, तो गोल्ड लोन, कंपनी से एडवांस या बैंक लोन लगभग हमेशा सस्ता पड़ेगा।